समय न्यूज़ 24' की पड़ताल के अनुसार, इस बार का चुनाव विकास के दावों और व्यक्तिगत संबंधों के बीच फंसा हुआ है। जहाँ पुराने पार्षद अपने 'अनुभव' को ढाल बना रहे हैं, वहीं नए प्रत्याशी 'परिवर्तन' के नारे के साथ युवाओं और महिलाओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव चिन्ह मिलने के बाद अब मुकाबला त्रिकोणीय और कहीं-कहीं चतुष्कोणीय होता दिख रहा है।
अगले कुछ दिन प्रत्याशियों के लिए अग्निपरीक्षा की तरह हैं। देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किस 'चिन्ह' पर भरोसा जताकर अपने वार्ड की कमान सौंपते हैं।
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