रिपोर्ट: समय न्यूज़ 24 ब्यूरो
नगर निगम चुनाव की बिसात बिछ चुकी है और नामांकन वापसी की प्रक्रिया समाप्त होते ही चुनाव मैदान की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह (Symbol) आवंटित किए जाने के साथ ही नगर निगम क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच गई है। अब गलियों और मोहल्लों में प्रत्याशियों का जनसंपर्क अभियान 'सुपर फास्ट' मोड में आ गया है।
चिन्ह मिलते ही बदली रणनीति
जैसे ही प्रत्याशियों को उनके चुनाव चिन्ह—किसी को 'खटिया ', किसी को 'ब्लैक बोर्ड ', तो किसी को 'अलमीरा '—मिले, वैसे ही प्रचार का अंदाज बदल गया। अब तक जो प्रत्याशी केवल अपना नाम बताकर वोट मांग रहे थे, वे अब अपने चुनाव चिन्ह के साथ मतदाताओं के बीच पहुँच रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए यह पल सबसे अहम था, क्योंकि उनकी पूरी पहचान अब उनके आवंटित चिन्ह पर टिकी है।
डिजिटल और जमीनी प्रचार का संगम
चुनाव चिन्ह मिलते ही प्रिंटिंग प्रेस में गहमागहमी बढ़ गई है। झंडे, बैनर, पोस्टर और पम्फलेट छपने शुरू हो गए हैं। वहीं, सोशल मीडिया (WhatsApp, Facebook, Instagram) पर भी 'वॉर रूम' सक्रिय हो गए हैं। प्रत्याशियों ने अपने चुनाव चिन्ह के साथ आकर्षक ग्राफिक्स और वीडियो संदेश साझा करना शुरू कर दिया है।
मोहल्लों में बढ़ी 'डोर-टू-डोर' दस्तक
नगर निगम पार्षद पद के उम्मीदवार अब सुबह की चाय से लेकर देर रात तक मतदाताओं के दरवाजे खटखटा रहे हैं। वार्डों की छोटी-छोटी गलियों में जनसंपर्क और पदयात्राओं का दौर शुरू हो गया है। प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए स्थानीय समस्याओं जैसे—नाली, सड़क, साफ-सफाई और स्ट्रीट लाइट के समाधान का पुरजोर वादा कर रहे हैं।
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