पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज (30 मार्च, सोमवार) राज्य विधान परिषद की सदस्यता से अपना त्यागपत्र सौंपने जा रहे हैं। हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद यह उनके दिल्ली के राजनीतिक सफर की आधिकारिक शुरुआत मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वयं विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत फैसला
नीतीश कुमार 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। भारतीय संविधान के 'निषेध और समवर्ती सदस्यता नियम, 1950' के अनुसार, यदि कोई राज्य विधानमंडल का सदस्य संसद के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है। आज इस समय सीमा का आखिरी दिन है, जिसके कारण मुख्यमंत्री अपनी परिषद की सदस्यता त्याग रहे हैं।
रविवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक
इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया से पहले रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के दिग्गज नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे। बैठक में बिहार की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की रणनीति पर गहन मंथन किया गया।
अनंत सिंह का बयान: 'नहीं माने मुख्यमंत्री'
मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह भी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा न देने और बिहार की कमान संभाले रखने का आग्रह किया था, लेकिन नीतीश कुमार अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री अब राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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