समय न्यूज़ 24 डेस्क रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को धनबाद का असर्फी अस्पताल चर्चा का केंद्र रहा। झरिया विधायक रागिनी सिंह ने सदन में सरकार से जवाब तलब किया कि आखिर क्यों एक निजी अस्पताल ने संजीत सिंह के शव को पैसों के लिए घंटों रोके रखा।
विधायक ने कहा कि एक तरफ सरकार सदन में बड़े-बड़े नियमों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर पीड़ित परिजनों को अस्पताल प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार उन अस्पतालों का लाइसेंस रद्द करेगी जो नियमों को ठेंगा दिखाकर शवों को बंधक बनाते हैं? इस मुद्दे पर सदन में काफी गहमागहमी रही, जिससे निजी अस्पतालों की मनमानी पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
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