क्रीड़ा भारती अधिवेशन में भाग लेने धनबाद पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत

City: Dhanbad | Date: 29/12/2018
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 धनबाद - क्रीड़ा भारती के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में हिस्सा लेने आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत शनिवार को धनबाद पहुंचे. वह कार्यक्रम स्थल राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर में रूके हैं. उनके आगमन के बाद धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह, पूर्व मंत्री समरेश सिंह, झारखंड के खेल मंत्री अमर बाउरी, धनबाद नगर निगम के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल समेत कई लोग पहुंचे. किसी को भी संघ प्रमुख से मिलने का सौभाग्य नहीं मिल पाया. संघ प्रमुख से सिर्फ क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष चेतन चौहान की मुलाकात हुई. कोलकाता से धनबाद पहुंचने के बाद कार्यक्रम स्थल राजकमल विद्या मंदिर में निर्धारित विश्रामस्थल पर गये. कुछ समय के बाद क्रीड़ा भारती के सम्मेलन में पहुंचे, जहां विभिन्न प्रांतों से आये प्रतिनिधि अपने तीन साल के कार्यों का विवरण दे रहे हैं.

30दिसंबर को स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में सभा को करेंगे संबोधित

धनबाद स्टेशन पर मोहन भागवत का जोरदार स्वागत किया गया. इसके बाद उनको कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में सीधा अधिवेशन स्थल ले जाया गया. भागवत दो दिन धनबाद में रहेंगे और 30दिसंबर को 3बजे बरवाअड्डा स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में सभा को संबोधित करेंगे. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास, राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू, खेल मंत्री अमर बाउरी समेत कई हस्तियां शामिल रहेंगे. कार्यक्रम को लेकर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गयी है. एसएसपी, एसपी, एसडीओ समेत कई प्रशासनिक अधिकारी अधिवेशन स्थल पर मौजूद रहकर हर गतिविधियों पर निगरानी रखे हुए हैं. बीच-बीच में वरीय अधिकारी सड़क पर गश्त कर रहे हैं. पुलिस चप्पे-चप्पे में तैनात है.

राजकमल में क्रीड़ा भारती अधिवेशन के दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरूआत सुबह 11 बजे शकुंतला मिश्रा, गीताताई समेत अन्य महिलाओं को पुष्पगुच्छ देकर हुई. इस कार्यक्रम में सिर्फ महिलाएं, उनकी उपलब्धियों और विकास से संबंधित बातों पर चर्चा हुई. मंच पर केवल महिलाएं ही उपस्थित थीं. महिला समन्वय समिति के अखिल भारतीय प्रमुख गीताताई गुंडे ने कहा कि सौ साल पहले पूर्व तक महिलाएं खुले मैदान में जाकर नहीं खेल सकती थी. सिर्फ अपने घर के आंगन में पारंपरिक खेल ही खेलती थी. लेकिन अब महिलाओं को समस्या रखने का मौका मिला है. क्रीड़ा भारती ने इसको बढ़ावा दिया है.

उन्होंने कहा कि हमारे देश में वैदिककाल से ही महिलाओं को सम्मान दिया जाता था और सक्षम समझा जाता है. कई भारतीय महिलाओं ने युद्ध करके देश की रक्षा और अपनी शक्ति का लौहा मनवाया है. भारत की मिलिट्री में महिलाओं को जगह मिलना गर्व की बात है. महिलाएं कमजोर नहीं होती. महिलाएं फूल भी है, चिंगारी भी है, ज्वाला और मशाल भीI

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