समय न्यूज़ 24 डेस्क मुंबई: भारतीय संगीत जगत की सबसे चमकती और सुरीली आवाज़ आज हमेशा के लिए खामोश हो गई। स्वर कोकिला आशा भोंसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वे पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। मुंबई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही संगीत प्रेमियों और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
सात दशकों का जादुई सफर
आशा भोंसले, जिन्हें दुनिया प्यार से 'आशा ताई' पुकारती थी, का करियर लगभग सात दशकों तक फैला रहा। उन्होंने अपनी आवाज़ से न केवल भारतीय सिनेमा को सजाया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय संगीत का मान बढ़ाया।
बहुमुखी प्रतिभा: उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती और पंजाबी समेत 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गीत गाए।
हर विधा में माहिर: चाहे वो शास्त्रीय संगीत हो, गजल हो, कव्वाली हो या आधुनिक पॉप गाने—आशा जी की आवाज़ हर सांचे में फिट बैठती थी।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: दुनिया में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग करने वाली गायिका के रूप में उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज है।
सम्मान और उपलब्धियां
संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने उन्हें सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा:
पद्म विभूषण: देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार: सिनेमा जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स।
दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और फिल्म इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज कलाकारों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। संगीतकारों का मानना है कि आशा जी का जाना भारतीय संस्कृति के एक बड़े हिस्से का अंत है।
"आशा जी की आवाज़ ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती। संगीत जगत ने आज अपनी सबसे अनमोल धरोहर खो दी है।" — शोक संदेश
अंतिम दर्शन और विदाई
बताया जा रहा है कि मुंबई में उनके आवास पर उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहाँ फिल्मी हस्तियां और उनके हजारों प्रशंसक उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
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