बिहार मैट्रिक बोर्ड की तरफ से जूतों की मनाही होने के बाद भी 10वीं बोर्ड के कई परीक्षार्थी ऐसे दिखे जो जूता पहनकर आए. पुलिस वालों ने उनसे जूते उतरवा लिए. बच्चों के लिए अब चिंता इस बात की थी की जूतों को वे कहां रखें? उन्हें कोई जगह नहीं दिख रही थी. एक सेंटर पर परीक्षार्थी ने पुलिस वाले से कहा कि अंकल जूते कहां रखूं? पुलिस वाले ने उसे घूरकर देखा तो परीक्षार्थी डर गया. वह खुले में एक बैंच के पीछे ईंटों के बीच में छिपाकर अंदर जाने लगा, तभी अचानक वो मुड़ा और पुलिस वाले से पूछा कि अंकल ये चोरी तो नहीं होगा. इससे पहले कि पुलिस वाला कुछ जवाब देता वह परीक्षा केन्द्र में दौड़कर घुस गया. अज्ञानता की वजह से चप्पल की जगह जूता पहन कर आए अधिकतर बच्चों की यही मनाेदशा थी. परीक्षार्थियों की चिंता एग्जाम से ज्यादा जूतों की सुरक्षा को लेकर दिखाई दी. कई छात्र थे जो जूतों को लेकर परेशान दिखे और कुछ ने जूतों के चोरी होने की भी शिकायत की. परीक्षार्थियों ने अपने जूते केन्द्र के बाहर ठेले खोमचे और चाय वालों की दुकान पर किराया देकर भी रखे. |