बोकारो: भाई-बहन को बंधक बनाने के मामले में दो गिरफ्तार, पीड़ितों का रांची में होगा इलाज

City: Bokaro | Date: 22/8/2018
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बोकारो.  दो साल तक कमरे में भाई-बहन को बंधक बनाए जाने के मामले में आरोपी क्लिनिक संचालक मंतोष गुप्ता की पत्नी और बेटे को कॉपरेटिव कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया गया है। एसपी कार्तिक एस के निर्देश पर ये कार्रवाई की गई है।  वहीं, बंधक बनाए गए दीपक और मंजूश्री का इलाज अब रांची के केंद्रीय मनोचिकित्सा केंद्र में किया जाएगा। दोनों भाई-बहन रेस्क्यू किए जाने के बाद अब तक कुछ भी बोल पाने में असमर्थ हैं। दोनों का इलाज अभी तक बोकारो जेनरल अस्पताल में किया जा रहा था। 

करोड़ों की संपत्ति का है मामला

बोकारो की पॉश कॉलोनी में करोड़ों के प्लॉट पर बनी बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए नेत्र चिकित्सक डॉक्टर डीके गुप्ता और उसके रिश्तेदार मंतोष गुप्ता ने जिसके मकान में क्लिनिक खोली, उसी भाई-बहन काे उसी की बिल्डिंग में दो साल तक बंधक बनाए रखा। मामले का खुलासा होने पर एडीजी अनिल पालटा 18 अगस्त यानी शनिवार को मिलने पहुंचे। पुलिस ने दोनों भाई-बहन मंजूश्री घोष (56) और दीपक घोष (50) को कैद से मुक्त कराया। एक ही कमरे में बंद रहने के कारण उनकी स्थिति गंभीर है। पुलिस ने डॉक्टर और अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। मंतोष गुप्ता की दो महीने पहले मौत हो चुकी है जबकि डॉक्टर डीके गुप्ता फरार चल रहा है।

किराए पर लिया मकान और हड़पने के लिए भाई-बहन को बंधक बना लिया

मंजूश्री के पिता एसके घोष बोकारो स्टील प्लांट में अफसर थे। वर्ष 1971 में उन्हें को-ऑपरेटिव कॉलोनी में प्लॉट संख्या 229 आवंटित हुआ। इस प्लाॅट पर घर बनाकर वह पत्नी और बेटा-बेटी के साथ रहने लगे। वर्ष 2001 में मंतोष गुप्ता ने इस प्लॉट के एक हिस्से को किराए पर लिया। वहां चश्मे की दुकान और क्लिनिक खोली। इसी क्लिनिक में उसके रिश्तेदार डॉ. डीके गुप्ता बैठते थे। इसके बाद दोनों ने भाई-बहन को बंधक बना लिया। कुछ दिन बाद दीपक को उसी दुकान पर नौकरी दी गई। लेकिन उसे कमरे से तब तक ही बाहर रहने की इजाजत थी, जब तक दुकान खुली रहती थी। फिर उसे उसी कमरे में बंद कर दिया जाता था।

जान से मारने की नीयत से कैद करने का केस

पुलिस ने को-आॅपरेटिव काॅलोनी के पूर्णेंदू कुमार सिंह की शिकायत पर नव ज्योति आई क्लिनिक के संचालक डॉ. डीके गुप्ता और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि मकान हड़पने के लिए मंजूश्री से जबरदस्ती हस्ताक्षर कराया। साथ ही जान से मारने की नीयत से भाई-बहन को बंधक बनाकर रखा।

एडीजी पालटा बोले- कब्जे के लिए बनाया बंधक, बोकारो एसपी करेंगे जांच

एडीजी (आधुनिकीकरण एवं प्रशिक्षण) अनिल पालटा अस्पताल में मंजूश्री व दीपक से मिले थे। पालटा ने कहा-अपने 28 साल के करियर में ऐसी खतरनाक साजिश नहीं देखी है। प्लॉट पर कब्जे के लिए भाई-बहन को बंधक बनाकर रखा गया था। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। उन्होंने बोकारो एसपी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। उन्होंने बताया था कि मंजूश्री बोकारो संत जेवियर स्कूल में उनसे एक क्लास सीनियर थीं। वह बोकारो ओल्ड जेवेरियंस एसोसिएशन (बोक्सा) के संरक्षक हैं। इसीलिए वे मंजूश्री से मिलने आए थे।

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