राज्य में अभी 15000हैवी व्हीकल्स है. जिसमें से 80प्रतिशत गाड़ियां सिर्फ ट्रक और ट्रेलर ही है. पर राज्य के हैवी व्हीकल के चालकों की परेशानी सरकार दूर कर पाने में असमर्थ हो गई है. उन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन पा रहा है. मजबूरी में उन्हें बरोजगार रहना पड़ रहा है. राज्य सरकार के बनाए नियमों के हिसाब से वैसे ही युवाओं को लाइसेंस जारी किया जाएगा, जो ट्रेनिंग प्राप्त कर सर्टिफिकेट परिवहन विभाग को दिखाएंगे. पर राज्य के तीन जिलों में लाइसेंस आसानी से बन जा रहा है. इस वजह से चालक उन्हीं जिलों का रुख लाइसेंस बनाने के लिए कर रहे हैं. इसके बदले में उन्हें दलालों के चक्कर में फंसना पड़ता है. अन्य जिलों से लाइसेंस बनवा देने की बात करने वाले दलाल डीटीओ कार्यालय में सक्रिय देखे जाते हैं. बता दें कि राज्य के सैंकड़ों युवा अन्य राज्यों में पलायन कर हैवी व्हीकल ही चलाते हैं।
रांची से नहीं बनेगा पर लातेहार, लोहरदगा और सिमडेगा से बन जाएगा लाइसेंस, फर्जीवाड़ा कर तीन जिलों से बनाया जा रहा लाइसेंस
पतरातू के रहने वाले रामेश्वर सिंह रांची अपना लाइसेंस बनाने आए थे. डीटीओ कार्यालय में उन्हें बताया गया कि बिना ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के लाइसेंस नहीं बनेगा. पर वहीं मौजूद दलाल जो हर वक्त सक्रिय रहते हैं, उन्होंने बताया कि हम आपका लाइसेंस सिमडेगा, लोहरदगा या लातेहार से बनवा देंगे. साथ ही ये भी बताया कि हर महीने करीब पांच से दस लोग लोहरदगा और सिमडेगा से लाइसेंस बना रहे हैं।राज्य में चालकों को हैवी व्हीलर के लिए प्रशिक्षित करने हेतु सिर्फ एक ही ट्रेनिंग संस्थान धनबाद में है. इसके अलावा राज्य के किसी भी अन्य जिले में नहीं है. इससे राज्य के युवाओं को इस रोजगार से जुड़े रहने में काफी दिक्कत हो रही है. राज्य के अन्य जिलों में ट्रेनिंग संस्थान खोलने की योजना है पर उसे अभी तक अमलीजामा पहना पाने में विभाग और सरकार को सफलता नहीं मिली है।
फर्जी तरीके से लाइसेंस बना कर रहे हजारों रुपए की वसूली
राज्य में हैवी लाइसेंस नहीं बन पाने का फायदा सीधे तौर पर फर्जी तरीके से लाइसेंस बनाने वाले दलालों को हो रहा है. जो चालक से लाइसेंस बना देने के नाम पर हजारों रुपये की वसूली करते हैं. ऐसे दलाल उन्हें लातेहार,सिमडेगा और लोहरदगा जिले से लाइसेंस बनाने की बात कहते हैं और फर्जी तरीके से सही लाइसेंस बना भी देते हैं।
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