हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के आरजेडी से हाथ मिलने की वजह से उनकी पार्टी में ही बगावत होने लगी है.
पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह रविवार को पटना में मांझी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं, जीतनराम मांझी का यह फैसला अलोकतांत्रिक है, तानाशाही है और वह अपने परिवार का हित साधने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं. मांझी अब अपने बेटे और अपने लिए कुर्सी मांग रहे हैं, लेकिन मेरी लड़ाई गरीबों के हित के लिए थी और इस पार्टी का गठन गरीबों के हित के लिए किया गया था. मैं मांझी के साथ बुरे दिन में भी रहा और उनको सीएम से हटाने का विरोध करता रहा. मांझी से मेरा कोई स्वार्थ नहीं रहा फिर भी मैं उनके साथ रहा. सीएम नीतीश कुमार से मेरे रिश्ते काफी अच्छे थे फिर भी मैं विरोध कर मांझी के साथ रहा, लेकिन मांझी द्वारा पार्टी में इस तरह का फैसला लेने के कदम से मुझे अफसोस है. वो अपने बेटे के लिये ये सब कर रहे हैं.उन्होंने कहा, लोग भ्रम में आरजेडी में चले गए हैं. इसलिए जीतन राम मांझी के महागठबंधन में शामिल होने के फैसले की निंदा करते हैं. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा महागठबंधन के साथ नहीं है. आज भी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा एनडीए का हिस्सा है और रहेगा. . इस बड़े फैसले से पहले 8 अप्रैल को हम की रैली होनी थी, लेकिन आनन-फानन में मांझी ने ये फैसला लिया. इतने बड़े फैसले के लिये न तो पार्टी के राज्य और न ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की गयी.
पूर्व मंत्री ने कहा कि मैंने इस फैसले के तुरंत बाद मांझी से फोन पर बात की, लेकिन उन्होंने फैसला लिये जाने की बात कही. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मांझी ने सिर्फ खुद से फैसला लिया.
हम फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष का चयन करने के लिए 10-15 दिनों में कार्यकर्ताओं का सम्मेलन करेंगे.
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