बाजार की व्यथा - Mr Vikash Sharma, Director, IAS Mantra , Ranchi


बजट दिवस से गिरने का जो क्रम शुरू हुआ था वो अब जा के थमा है | जी हाँ मई शेयर बाजार का ही बात कर रहा हूँ |

शेयर बाजार और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए तो बजट एक बुरे सपने की तरह रहा है और उसको उस नींद से उठने के बाद भी नज़र आ रहा है |

एक तो हमारा सामाजिक वर्ग शेयर बाजार के प्रति हमेशा उदासीन रहा है पर पिछले कुछ वर्षो से हमारा आम आदमी का विश्वास शेयर बाजार एवं म्यूच्यूअल फण्ड पर बढ़ा है | इसका मुख्या कारण बचत योजनाओं एवं बैंकों से प्राप्त दरों को निरस्त कर पाने में असमर्थता को माना जा सकता है | बैंको द्वारा दिए जा रहे सालाना दर वार्षिक महंगाई के दरों से काम है अतः आम भारतीय ने शेयर बाजार का में विदेशी निवेशकों का एक छात्र राज भी टूट रहा है |

पर कॉर्पोरटे सेक्टर जिसके विकास के बिना हम मजबूत अर्थव्यवस्था की उम्मीद नहीं कर सकते उसकी एक बहुत बड़ी आवश्यकता है पूंजीकरण | ये सच है की २५० करोड़ से कम टर्नओवर वाले कंपनियों हेतु कॉर्पोरेट टैक्स २५% किया गया है ( जो पूर्व ३०% था ) जो भविष्य में उत्पादन प्रक्रिया को उत्साहित कर सकती है परन्तु उत्पादन करने हेतु पूंजी की आवश्यकता होती है और भारतीय औद्योगिक विकास में पूंजी की व्यवस्था रही है |

ऐसे वक़्त में जब बैंक गैर निश्पाती परिसंपतियों के सर्पदंश झेल रहा है तो कॉर्पोरेट सेक्टर का एक मात्र सहारा शेयर बाजार ही था | डेवलप्ड नेशंस की तुलना में हमारा शेयर बाजार नवजात शिशु के सामान है | अभी भी विकसित राष्ट्र की तुलना में हमारा शेयर बाजार बाजार का मार्किट कैपिटलाइजेशन (पूंजीकरण ) काफी कम है और भारत जैसे देश में इसे सतत प्रोत्साहन की आवश्यकता है पर हमारे वित्त मंत्री द्वारा लॉन्ग टर्म कैपिटल टैक्स लगाना असंगत सा प्रतीत होता है | कॉर्पोरेट सेक्टर्स को व्यापर एवं नियोजन हेतु पूंजी की आवश्यकता होती है जिसकी प्राप्ति ऋण के रूप में प्राप्त की जाती है | बैंकों की कमजोर अर्थव्यवस्था से हम परिवित हैं | इस वक़्त उनका नपा ८ लाख करोड़ है और उनसे ऋण प्राप्त करना एक दूसरी प्रक्रिया है तो रहा सहा सहारा शेयर बाजार से था पर वहां पर भी लटकग के निरोपण से निवेशकों के प्रवाह पर असर पड़ेगा |

वैसे भी ये तिहरी कर व्यवस्था बजट सिद्धान्त के विपरीत है | कंपनी लाभ पर कर देती है और उसका अप्रत्यक्ष भार निवेशकों पर है और साथ ही हर ट्रांसक्शन पर उन्हें S.T अर्थात security transaction tax चुकाना ही होता है और अब उसके बाद LTCG टैक्स को लागू करना | माफ़ कीजियेगा वित्त मंत्री जी पर प्रश्न चिन्ह है | ये तिहरी कर व्यवस्था का प्रतिकूल असर शीघ्र ही अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है और इसका मेक इन इंडिया जैसे परियोजनाओं को प्रभावित कर सकता है |

Mr Vikash Sharma, Director,
IAS Mantra ,
Ranchi